Monday, 27 January 2020

Why Client Satisfaction is Important in Service Industry?

Customer satisfaction is a marketing term that measures how products or services supplied by a company meet or surpass a customer’s expectation.

Customer satisfaction is important because it provides marketers and business owners with a metric that they can use to manage and improve their businesses.

If you don’t care about customers’ satisfaction, don’t expect them to care about your services or products. Sad, but true. The sooner you face it, the better you’ll perform.

High-standard customer service can win your clients’ hearts and make you recognizable within your target group. Nowadays when social media play such an important role in making decisions it’s crucial to keep an eye on the quality of customer service you provide.

A Loyal customer is a treasure you should keep and hide from the world

If you don’t care about customers’ satisfaction, don’t expect them to care about your services or products. Sad, but true.  The sooner you face it, the better you’ll perform.

High-standard customer service can win your clients’ hearts and make you recognizable within your target group. Nowadays when social media play such an important role in making decisions it’s crucial to keep an eye on the quality of customer service you provide.

Why customer satisfaction is important?

1. Measuring customer satisfaction should become your daily habit – not something you do from time to time and only if you’re about to face crisis management.

2. They can stop being your clients in a heartbeat. Customer satisfaction is a factor that helps you stand out of the competition. 

Your competitive rivals are just waiting for you to make a wrong move. What is more, they can often play the role of an instigator. Being prepared for their provocations is not enough if you don’t know how to deal with the negative backlash.

However, if you provide your customers with amazing customer service, you will gain arguments to convince those uncertain of your services.

Providing great customer service will satisfy both you and your targets. They get proper service, you get a proper revenue and everyone is happy.

As simple as that. Think, is there something more you can do to better treat your audience? That’s why you should never forget the importance of customer satisfaction.

It’s high time to face the truth – your brand can always do better!

Thank u so much Guys 👍

Stay Fit, Take Care & Keep Smiling 🤗

God Bless 🙏

Kranti Gaurav

XLRI, Jamshedpur

Wednesday, 22 January 2020

परिश्रम का महत्व

परिश्रम का मनुष्य के लिए वही महत्व है जो उसके लिए खाने, पीने और सोने का है । बिना परिश्रम का जीवन व्यर्थ होता है क्योंकि प्रकृति द्वारा दिए गए संसाधनों का उपयोग वही कर सकता है जो परिश्रम पर विश्वास करता है ।

परिश्रम अथवा कर्म का महत्व श्रीकृष्ण ने भी अर्जुन को गीता के उपदेश द्वारा समझाया था । उनके अनुसार:

”कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन: ।”

परिश्रम अथवा कार्य ही मनुष्य की वास्तविक पूजा-अर्चना है । इस पूजा के बिना मनुष्य का सुखी-समृद्ध होना अत्यंत कठिन है । वह व्यक्ति जो परिश्रम से दूर रहता है अर्थात् कर्महीन, आलसी व्यक्ति सदैव दु:खी व दूसरों पर निर्भर रहने वाला होता है।

परिश्रमी व्यक्ति अपने कर्म के द्वारा अपनी इच्छाओं की पूर्ति करते हैं । उन्हें जिस वस्तु की आकांक्षा होती है उसे पाने के लिए रास्ता चुनते हैं । ऐसे व्यक्ति मुश्किलों व संकटों के आने से भयभीत नहीं होते अपितु उस संकट के निदान का हल ढूँढ़ते हैं। अपनी कमियों के लिए वे दूसरों पर लांछन या दोषारोपण नहीं करते ।

दूसरी ओर कर्महीन अथवा आलसी व्यक्ति सदैव भाग्य पर निर्भर होते हैं । अपनी कमियों व दोषों के निदान के लिए प्रयास न कर वह भाग्य का दोष मानते हैं । उसके अनुसार जीवन में उन्हें जो कुछ भी मिल रहा है या फिर जो भी उनकी उपलब्धि से परे है उन सब में ईश्वर की इच्छा है । वह भाग्य के सहारे रहते हुए जीवन पर्यंत कर्म क्षेत्र से भागता रहता है । वह अपनी कल्पनाओं में ही सुख खोजता रहता है परंतु सुख किसी मृगतृष्णा की भाँति सदैव उससे दूर बना रहता है ।

किसी विद्वान ने सच ही कहा है कि परिश्रम सफलता की कुंजी है । आज यदि हम देश-विदेश के महान अथवा सुविख्यात पुरुषों अथवा स्त्रियों की जीवन-शैली का आकलन करें तो हम यही पाएँगे कि जीवन में इस ऊँचाई या प्रसिद्‌धि के पीछे उनके द्वारा किए गए सतत अभ्यास व परिश्रम का महत्वपूर्ण योगदान है ।

अमेरिका, चीन, जापान आदि विकसित देश यदि उन्नत देशों में हैं तो इसलिए कि वहाँ के नागरिकों ने अथक परिश्रम किया है। दूसरे विश्व युद्ध में भारी नुकसान के बाद भी आज यदि जापान ने विश्व जगत में अपना विशिष्ट स्थान बनाया है तो उसका प्रमुख कारण यही है कि वहाँ के लोगों में दृढ़ इच्छाशक्ति व अथक परिश्रम की भावना कूट-कूटकर भरी हुई है ।

परिश्रमी व्यक्ति ही किसी समाज में अपना विशिष्ट स्थान बना पाते हैं । अपने परिश्रम के माध्यम से ही कोई व्यक्ति भीड़ से उठकर एक महान कलाकार, शिल्पी, इंजीनियर, डॉक्टर अथवा एक महान वैज्ञानिक बनता है ।

परिश्रम पर पूर्ण आस्था रखने वाले व्यक्ति ही प्रतिस्पर्धाओं में विजयश्री प्राप्त करते हैं । किसी देश में नागरिकों की कर्म साधना और कठिन परिश्रम ही उस देश व राष्ट्र को विश्व के मानचित्र पर प्रतिष्ठित करता है ।

“विश्वास करो, यह सबसे बड़ा देवत्व है कि –

तुम पुरुषार्थ करते मनुष्य हो, मैं स्वरूप पाती मृत्तिका ।”

अत: उन्नति विकास एवं समृद्धि के लिए यह आवश्यक है कि सभी मनुष्य परिश्रमी बनें । परिश्रम वह कुंजी है जो साधारण से साधारण मनुब्ध को भी विशिष्ट बना देती है । परिश्रमी लोग सदैव प्रशसा व सम्मान पाते हैं । वास्तविक रूप में उन्नति व विकास के मार्ग पर वही व्यक्ति अग्रसर रहते हैं जो परिश्रम से नहीं भागते ।

भाग्य का सहारा वही लोग लेते हैं जो कर्महीन हैं । अत: हम सभी को परिश्रम के महत्व को स्वीकारना एवं समझना चाहिए तथा परिश्रम का मार्ग अपनाते हुए स्वयं का ही नहीं अपितु अपने देश और समाज के नाम को ऊँचाई पर ले जाना चाहिए ।

Wednesday, 15 January 2020

मैडम का गुस्सा

एक बहुत ही सुंदर सी राजकुमारी थी , उसको गुस्सा बहुत ज्यादा आता था | उसके गुस्से से घर के सारे लोग बहुत ही परेशान रहा करते थे , लेकिन उसका गुस्सा कभी कम ही नहीं होता था | एक दिन जब घर के सारे लोग उससे परेशान हो गए तो सबने मिलकर उसके पिता को यह बात बताया| उसके पिता जी जब यह बात सुने तो उनको भी बहुत ही ज्यादा दुःख हुआ , उन्होंने ठान लिया की अब इसका गुस्सा कम करने का कोई न कोई रास्ता निकालना पड़ेगा | एक दिन उसने अपनी बेटी को बुलाया और बोला मे आप के साथ एक गेम खेलना चाहता हू | लडकी बहुत ही ज्यादा खुश हो गयी और बोली क्यों नहीं पिता जी | उसके पापा ने बोला – तुमको जब भी किसी पर गुस्सा आएगा तुम दीवार पर एक कील ठोक देना और जिस दिन गुस्सा न आये दीवार की एक कील निकाल देना | लडकी ने बोला ठीक है पापा , लेकिन आप को गेम जीतने के बाद बहुत ही अच्छा सा गिफ्ट देना होगा || उसके पापा बोले ठीक है |

पहले ही दिन लडकी को खूब गुस्सा आया और उसने दस कील दीवार मे लगा दिया | अगले दिन कुछ और , फिर धीरे – धीरे घर के बहुत सारे लोग उससे बात करना बंद कर दिया | अब वह बहुत ही शांत रहती थी और कुछ टाइम बीत जाने के बाद उसका गुसा कम होते गया और अब वह एक – एक करके सब कील निकालने लगी | ऐसा करते – करते काफी टाइम बीत गया और एक दिन सब कील दीवार से नीकल गयी और अब उसका गुस्सा भी बहुत कम हो चुका था |

जब सब कील निकल गयी तो वह एकदम बदल चुकी थी और अपने पापा के पास जाकर बोली पापा मैं तो यह गेम जीत गयी | तो उसके पापा ने समझाया कि बेटी देखो जो कील तुमने दीवार पर लगाया था और अब नीकाल दिया वहा कितना दरार पड़ गया है | इसी तरह तुम जब भी किसी से गुस्सा करती हो तो समझ लो कि तुम अपने रिश्ते मे एक दीवार खड़ी कर देती हो |लड़की को यह बात समझ आ गयी थी और वह रोते हुए बोली यही है मेरा सबसे बड़ा गिफ्ट, अब मैं किसी पर भी गुस्सा नहीं करूंगीी

तो दोस्तों इस कहानी से हम लोगो को यही सीख मिलता है की गुस्सा इंसान को कुछ भी करा सकता है , इसलिए गुस्सा को छोड़ देने मे ही भलाई है ||

Tuesday, 14 January 2020

अनोखी साइकिल रेस

अनोखी साइकिल रेस Importance of Teamwork

टीम के साथ मिलकर काम करने की महत्ता बताती हिंदी कहानी 
अमर एक multi national company का ग्रुप लीडर था। काम करते-करते उसे अचानक ऐसा लगा की उसके टीम में मतभेद बढने लगे हैं। और सभी एक-दूसरे को नीचा दिखाने में लगे हुए हैं। इससे निबटने के लिए उसने एक तरकीब सोची।

उसने एक meeting बुलाई और team members से कहा –

Sunday को आप सभी के लिए एक साइकिल race का आयोजन किया जा रहा है। कृपया सब लोग सुबह सात बजे अशोक नगर चौराहे पर इकठ्ठा हो जाइएगा।

तय समय पर सभी अपनी-अपनी साइकलों पर इकठ्ठा हो गए।

अमर ने एक-एक करके सभी को अपने पास बुलाया और उन्हें उनका लक्ष्य बता कर स्टार्टिंग लाइन पर तैयार रहने को कहा। कुछ ही देर में पूरी टीम रेस के लिए तैयार थी, सभी काफी उत्साहित थे और रूटीन से कुछ अलग करने के लिए अमर को थैंक्स कर रहे थे।

अमर ने सीटी बजायी और रेस शुरू हो गयी।

Boss को impress करने के लिए हर कोई किसी भी कीमत पर रेस जीतना चाहता था। रेस शुरू होते ही सड़क पर अफरा-तफरी मच गयी… कोई दाएं से निकल रहा था तो कोई बाएँ से… कई तो आगे निकलने की होड़ में दूसरों को गिराने से भी नहीं चूक रहे थे।

इस हो-हल्ले में किसी ने अमर के निर्देशों का ध्यान ही नहीं रखा और भेड़ चाल चलते हुए सबसे आगे वाले साइकिलिस्ट के पीछे-पीछे भागने लगे।

पांच मिनट बाद अमर ने फिर से सीटी बजायी और रेस ख़त्म करने का निर्देश दिया। एका -एक सभी को रेस से पहले दिए हुए निर्देशों का ध्यान आया और सब इधर-उधर भागने लगे। लेकिन अमर ने उन्हें रोकते हुए अपने पास आने का इशारा किया।

सभी बॉस के सामने मुंह लटकाए खड़े थे और रेस पूरी ना कर पाने के कारण एक-दूसरे को दोष दे रहे थे।

अमर ने मुस्कुराते हुए अपनी टीम की ओर देखा और कहा-

“अरे क्या हुआ? इस टीम में तो एक से एक चैंपियन थे पर भला क्यों कोई भी व्यक्ति इस अनोखी साइकिल  रेस को पूरा नहीं कर सका?”

अमर ने बोलना जारी रखा- “मैं बताता हूँ क्या हुआ….दरअसल आप में से किसी ने भी अपने लक्ष्य की तरफ ध्यान ही नही दिया। अगर आप सभी ने सिर्फ अपने लक्ष्य पर ध्यान दिया होता तो आप सभी विजेता बन गये होते , क्योंकि सभी व्यक्ति का target अलग-अलग था। सभी को अलग-अलग गलियों में जाना था। हर किसी का लक्ष्य भिन्न था। आपस में कोई मुकाबला था ही नही।

लेकिन आप लोग सिर्फ एक दूसरे को नीचा दिखाने में लगे रहे, जबकि आपने अपने लक्ष्य को तो ठीक से समझा ही नही। ठीक यही माहौल हमारी टीम का हो गया है। आप सभी के अंदर वह अनोखी बात है, जिसकी वजह से टीम को आप की जरुरत है। लेकिन आपसी unhealthy competition के कारण ना ही टीम और ना ही आप का विकास हो पा रहा है। आने वाला आपका कल, आपके हाथ में है। हम या तो एक-दूसरे की ताकत बन कर एक-दूसरे को विकास के पथ पर ले जा सकते है या आपसी competition के चक्कर में अपना और दूसरों का समय व्यर्थ कर सकते है।

मेरी आप सबसे यही request है कि एक individual की तरह नहीं बल्कि एक team की तरह काम करिए…याद रखिये individual performer बनने से कहीं ज्यादा ज़रूरी एक team-player बनना है।” 

Monday, 6 January 2020

स्त्रियाँ, कुछ भी बर्बाद नही होने देतीं।

स्त्रियाँ,

कुछ भी बर्बाद नही होने देतीं।

वो सहेजती हैं।
संभालती हैं।
ढकती हैं।
बाँधती हैं।

उम्मीद के आख़िरी छोर तक

कभी तुरपाई कर के।
कभी टाँका लगा के।
कभी धूप दिखा के।
कभी हवा झला के।
कभी छाँटकर।
कभी बीनकर।
कभी तोड़कर।
कभी जोड़कर।

देखा होगा ना👱‍♀ ?

अपने ही घर में उन्हें
खाली डब्बे जोड़ते हुए। 
बची थैलियाँ मोड़ते हुए।
बची रोटी शाम को खाते हुए।
दोपहर की थोड़ी सी सब्जी में तड़का लगाते हुए।
बचे हुए खाने से अपनी थाली सजाते हुए।

दीवारों की सीलन तस्वीरों से छुपाते हुए।
फ़टे हुए कपड़े हों।
टूटा हुआ बटन हो।
 पुराना अचार हो।
सीलन लगे बिस्किट,
चाहे पापड़ हों।
डिब्बे मे पुरानी दाल हो।
गला हुआ फल हो।
मुरझाई हुई सब्जी हो।

या फिर 😧

तकलीफ़ देता " रिश्ता "
वो सहेजती हैं।
संभालती हैं।
ढकती हैं।
बाँधती हैं।
उम्मीद के आख़िरी छोर तक...

इसलिए ,  आप अहमियत रखिये👱‍♀!

वो जिस दिन मुँह मोड़ेंगी
तुम ढूंढ नहीं पाओगे...।

"मकान" को "घर" बनाने वाली रिक्तता उनसे पूछो जिन घर मे नारी नहीं वो घर नहीं मकान कहे जाते हैं।

 सादर प्रणाम 🙏🏻